सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: घरेलू हिंसा अधिनियम की शिकायतें धारा 482 CrPC / 528 BNSS के तहत हाई कोर्ट द्वारा रद्द की जा सकती हैं
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2025 को एक ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 12(1) के तहत दर्ज शिकायतों को हाई कोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों के तहत (Section 482 CrPC / Section 528 BNSS) रद्द कर सकता है।
मुख्य बिंदु:
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न्यायालय की स्पष्टता: हाई कोर्ट की यह राय कि CrPC की धारा 482 DV Act की धारा 12(1) वाली कार्यवाहियों को रद्द करने के लिए प्रयोग नहीं की जा सकती – गलत मानी गई है।
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महत्वपूर्ण प्रेक्षण: कोर्ट ने माना कि DV Act की कार्यवाहियाँ भले ही सिविल नेचर की हों, पर यदि न्याय की मंशा से विपरीत उपयोग हो रहा हो, तो हाई कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।
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सीमा का संकेत: कोर्ट ने चेताया कि चूंकि यह एक कल्याणकारी कानून है, इसलिए हाई कोर्ट को बहुत सावधानी और संयम के साथ इस धारा का प्रयोग करना चाहिए – केवल जब स्पष्ट रूप से कानून का दुरुपयोग या गंभीर अन्याय हो।
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मानवता और सीख: जस्टिस ओका ने माना कि पूर्व में बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय का हिस्सा रहे वे स्वयं थे, लेकिन अब उस मत को गलत मानते हैं – "जज के लिए भी सीखने की प्रक्रिया हमेशा जारी रहती है।"
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केस का नाम: Shaurabh Kumar Tripathi vs Vidhi Rawal
Citation: 2025 LiveLaw (SC) 599
निष्कर्ष:
यह फैसला DV Act के क्रियान्वयन और न्यायपालिका की भूमिका पर एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है – जहां एक ओर महिलाओं को संरक्षण मिलता है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग से बचने की व्यवस्था भी सुनिश्चित होती है।
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